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Saturday, February 7, 2015

Ancestors and descendants of shri ram , who was the 64th ruler of suryavansh.

ramayan in world

Ramayana means Rama's travel path
Faculty jobs in adikavi Valmiki Ramayan processed not only in the sense is that this unique country-foreign languages in various disciplines of literature of more than three hundred original compositions of whittaker upjivya is, on the contrary in this context also that it in addition to the many countries India theatrical, music, sculpture and painting influenced the arts and ancient Indian history sources its origin in spite of the failure of all efforts to explore this Homer processed ' allied ' And ' Odyssey ', Virgil processed ' ainaid ' like ' comedy ' dante and processed one of the worlds best Devine is epic. ' Ramayana ' is ' as ' RAM analyze of precession which means "RAM travel path, because precession is yatrapthavachi. It is also implicit in the fact that it arthavatta originally based on two of RAM's victory in which the first visit if love-coincidentally, Haas-is replete with glee and joy-joke, the other tribulation, cliente, disconnection, distraction, vivshata and covered with anguish. Most of the world learned the basic premise of the second visit ramkatha hosted agrees. A shloki by Ravana in the Ramayana legend of RAM from one March has only rupayit slaughter.
Mrigan kanchanam tapovnadi gamnan RAM hatva adau. Miss. vaidhehi sugreevmarnan harnan jatayu sambhashnam. Vali dasham tarnan Lanka Puri sea nearing.Taddhi ramaynam kumbhakarn pashchad Ravana hannan.
The tragic reality of life in the abduction of SITA Rama Katha rupayit and their search isextremely exciting. Ramkatha hosted foreign-travel in the context of the particular importance of SITA's travel search.
Valmiki Ramayana, kishkindha episode forty from tetalis is the extended charactersbetween chapters which is reputed as ' digvarnan '. It apes the messengers in different directions by Raj bali to have separate guidelines that meets the contemporarygeography of Asia.
This is described by valmiki, several important research locations around the worldhave been trying to identify on the modern map. The messengers in the East bycreepage sugreev seven States to beautify yavadvip (Java), Golden Island (Sumatra) and yatnapurvak jankasuta to explore recopa island was ordered. That order also saidthat ahead of the yav is a mountain peak Shishir k. Dube Island heaven to touch andwhich gods and monsters reside.
Yanivanton yav dvipan saptarajyopshobhitam. Dvipan suvarnakar manditam Goldenrecopa. Javadvip atikramya shishiro name Mountain:. Divan sprishti shrringan served:devdanav.1
The beginning of the history of South-East Asia is proof of the same dastaveti.Indonesia's Borneo island from the late third century justifications to see strong evidence of Indian culture. In a Sanskrit inscription of mulvarma's bornean Islandscommendation is engraved as follows-
Shrimat: Mr. narendrasya cosigned mahatman:. Putroshvavarma noted:yathanshuman. vanshakarta. Tasya son mahatman: tapobladmanvit:.Teshantrayanampravar: tapobladmanvit:.. Mr. mulvamrma rajandroyashtvavahusuvarnakam. Tasya yagyasya yupoyan dvijendrassamprakalpit:..2
The father of ashvavarma and the original in the article rock Verma grandfather mentions kundag. Bornean Indian culture and Sanskrit language will also be installed in time. Means that a lot of the original Verma bhartavasi rajatvakal were the first in the region. Java island and nearby areas after the description of express shonnad and administered the same as black cloud visible is mentioned in which the sea is a huge roared. This is the sea coast is the island where fierce land of residence shalmalik, a Garuda mandeh called Monster Live that safety zone sea Keep hanging on the shell of the intermediate shikhron. Prepare ahead and Sura are sea ocean dadhi. Then, there are the philosophy of white abhavale kshir sea. The sea is black mountain which he called middle rishabh called is a lake. After the delicious sea jalvala a frightening kshir sea which is a huge horse passes the home is fire.3
' Mahabharata ' in a fiction that bhriguvanshi arv Rishi's anger from which fire flameoccurred, it was the possibility of the destruction of the world. In such a situation heput the fire at sea. There was fire in the ocean where she immersed, horse face (vadvamukh) became and flames were out. That is why his name had been vadvanal.
Modern reviewers recognized that this area of the Pacific Ocean indicate a volcano. From the site malaskka may be between the philippins waterways.4 reality is often between the island groups of Indonesia philippins volcanic explosion many of which are historical evidence. Dadhi, Dhrit and Sura regarding the Black Sea, like sea water kshir aura colors indicators appear. Badvamukh mountain of North jupiter, a thirteen planned gold where the remaining holding Earth snake appear sitting. The mountain keeps a golden flag fluttering Palm marks. This is a limitation of the East pool flag. Then suvarnamay is the name of the mountain which peaks rise someones. The Sun orbiting from North round jambu Island are located, when siemens Then there are their clarity in this area of philosophy. Similar to the Sun are visible someones Lucent. Ahead of the mountain area is unknown.5 is jupiter means gold. It is estimated that the jupiter mount samb
रामायण का अर्थ राम का यात्रा पथ
आदिकवि वाल्मीकि कृत रामायण न केवल इस अर्थ में अद्वितीय है कि यह देश-विदेश की अनेक भाषाओं के साहित्य की विभिन्न विधाओं में विरचित तीन सौ से भी अधिक मौलिक रचनाओं का उपजीव्य है, प्रत्युत इस संदर्भ में भी कि इसने भारत के अतिरिक्त अनेक देशों के नाट्य, संगीत, मूर्ति तथा चित्र कलाओं को प्रभावित किया है और कि भारतीय इतिहास के प्राचीन स्रोतों में इसके मूल को तलाशने के सारे प्रयासों की विफलता के बावजूद यह होमर कृत 'इलियाड' तथा 'ओडिसी', वर्जिल कृत 'आइनाइड' और दांते कृत 'डिवाइन कॉमेडी' की तरह संसार का एक श्रेष्ठ महाकाव्य है। 'रामायण' का विश्लेषित रुप 'राम का अयन' है जिसका अर्थ है 'राम का यात्रा पथ', क्योंकि अयन यात्रापथवाची है। इसकी अर्थवत्ता इस तथ्य में भी अंतर्निहित है कि यह मूलत: राम की दो विजय यात्राओं पर आधारित है जिसमें प्रथम यात्रा यदि प्रेम-संयोग, हास-परिहास तथा आनंद-उल्लास से परिपूर्ण है, तो दूसरी क्लेश, क्लांति, वियोग, व्याकुलता, विवशता और वेदना से आवृत्त। विश्व के अधिकतर विद्वान दूसरी यात्रा को ही रामकथा का मूल आधार मानते हैं। एक श्लोकी रामायण में राम वन गमन से रावण वध तक की कथा ही रुपायित हुई है।
अदौ राम तपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम्। वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीव संभाषणम्। वालि निग्रहणं समुद्र तरणं लंका पुरी दास्हम्। पाश्चाद् रावण कुंभकर्ण हननं तद्धि रामायणम्।
जीवन के त्रासद यथार्थ को रुपायित करने वाली राम कथा में सीता का अपहरण और उनकी खोज अत्यधिक रोमांचक है। रामकथा की विदेश-यात्रा के संदर्भ में सीता की खोज-यात्रा का विशेष महत्व है।
वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड के चालीस से तेतालीस अध्यायों के बीच इसका विस्तृत वर्ण हुआ है जो 'दिग्वर्णन' के नाम से विख्यात है। इसके अंतर्गत वानर राज बालि ने विभिन्न दिशाओं में जाने वाले दूतों को अलग-अलग दिशा निर्देश दिया जिससे एशिया के समकालीन भूगोल की जानकारी मिलती है।
इस दिशा में कई महत्वपूर्ण शोध हुए है जिससे वाल्मीकी द्वारा वर्णित स्थानों को विश्व के आधुनिक मानचित्र पर पहचानने का प्रयत्न किया गया है। कपिराज सुग्रीव ने पूर्व दिशा में जाने वाले दूतों के सात राज्यों से सुशोभित यवद्वीप (जावा), सुवर्ण द्वीप (सुमात्रा) तथा रुप्यक द्वीप में यत्नपूर्वक जनकसुता को तलाशने का आदेश दिया था। इसी क्रम में यह भी कहा गया था कि यव द्वीप के आगे शिशिर नामक पर्वत है जिसका शिखर स्वर्ग को स्पर्श करता है और जिसके ऊपर देवता तथा दानव निवास करते हैं।
यनिवन्तों यव द्वीपं सप्तराज्योपशोभितम्। सुवर्ण रुप्यक द्वीपं सुवर्णाकर मंडितम्। जवद्वीप अतिक्रम्य शिशिरो नाम पर्वत:। दिवं स्पृशति श्रृंगं देवदानव सेवित:।१
दक्षिण-पूर्व एशिया के इतिहास का आरंभ इसी दस्तावेती सबूत से होता है। इंडोनेशिया के बोर्नियो द्वीप में तीसरी शताब्दी को उत्तरार्ध से ही भारतीय संस्कृति की विद्यमानता के पुख्ता सबूत मिलते हैं। बोर्नियों द्वीप के एक संस्कृत शिलालेख में मूलवर्मा की प्रशस्ति उत्कीर्ण है जो इस प्रकार है-
श्रीमत: श्री नरेन्द्रस्य कुंडगस्य महात्मन:। पुत्रोश्ववर्मा विख्यात: वंशकर्ता यथांशुमान्।। तस्य पुत्रा महात्मान: तपोबलदमान्वित:। तेषांत्रयानाम्प्रवर: तपोबलदमान्वित:।। श्री मूलवम्र्मा राजन्द्रोयष्ट्वा वहुसुवर्णकम्। तस्य यज्ञस्य यूपोयं द्विजेन्द्रस्सम्प्रकल्पित:।।२
इस शिला लेख में मूल वर्मा के पिता अश्ववर्मा तथा पितामह कुंडग का उल्लेख है। बोर्नियों में भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा के स्थापित होने में भी काफी समय लगा होगा। तात्पर्य यह कि भारतवासी मूल वर्मा के राजत्वकाल से बहुत पहले उस क्षेत्र में पहुँच गये थे। जावा द्वीप और उसके निकटवर्ती क्षेत्र के वर्णन के बाद द्रुतगामी शोणनद तथा काले मेघ के समान दिलाई दिखाई देने वाले समुद्र का उल्लेख हुआ है जिसमें भारी गर्जना होती रहती है। इसी समुद्र के तट पर गरुड़ की निवास भूमि शल्मलीक द्वीप है जहाँ भयंकर मानदेह नामक राक्षस रहते हैं जो सुरा समुद्र के मध्यवर्ती शैल शिखरों पर लटके रहते है। सुरा समुद्र के आगे घृत और दधि के समुद्र हैं। फिर, श्वेत आभावाले क्षीर समुद्र के दर्शन होते हैं। उस समुद्र के मध्य ॠषभ नामक श्वेत पर्वत है जिसके ऊपर सुदर्शन नामक सरोवर है। क्षीर समुद्र के बाद स्वादिष्ट जलवाला एक भयावह समुद्र है जिसके बीच एक विशाल घोड़े का मुख है जिससे आग निकलती रहती है।३
'महाभारत' में एक कथा है कि भृगुवंशी और्व ॠषि के क्रोध से जो अग्नि ज्वाला उत्पन्न हुई, उससे संसार के विनाश की संभावना थी। ऐसी स्थिति में उन्होंने उस अग्नि को समुद्र में डाल दिया। सागर में जहाँ वह अग्नि विसर्जित हुई, घोड़े की मुखाकृति (वड़वामुख) बन गयी और उससे लपटें निकलने लगीं। इसी कारण उसका नाम वड़वानल पड़ा।
आधुनिक समीक्षकों की मान्यता है कि इससे प्रशांत महासागर क्षेत्र की किसी ज्वालामुखी का संकेत मिलता है। वह स्थल मलस्क्का से फिलिप्पींस जाने वाले जलमार्ग के बीच हो सकता है।४ यथार्थ यह है कि इंडोनेशिया से फिलिप्पींस द्वीप समूहों के बीच अक्सर ज्वालामुखी के विस्फोट होते रहते हैं जिसके अनेक ऐतिहासिक प्रमाण हैं। दधि, धृत और सुरा समुद्र का संबंध श्वेत आभा वाले क्षीर सागर की तरह जल के रंगों के संकेतक प्रतीत होते हैं। बड़वामुख से तेरह योजना उत्तर जातरुप नामक सोने का पहाड़ है जहाँ पृथ्वी को धारण करने वाले शेष नाग बैठे दिखाई पड़ते हैं। उस पर्वत के ऊपर ताड़ के चिन्हों वाला सुवर्ण ध्वज फहराता रहता है। यही ताल ध्वज पूर्व दिशा की सीमा है। उसके बाद सुवर्णमय उदय पर्वत है जिसके शिखर का नाम सौमनस है। सूर्य उत्तर से घूमकर जम्बू द्वीप की परिक्रमा करते हुए जब सैमनस पर स्थित होते हैं, तब इस क्षेत्र में स्पष्टता से उनके दर्शन होते हैं। सौमनस सूर्य के समान प्रकाशमान दृष्टिगत होते हैं। उस पर्वत के आगे का क्षेत्र अज्ञात है।५ जातरुप का अर्थ सोना होता है। ऐसा अनुमान किया जाता है कि जातरुप पर्वत का संबंध प्रशांत महासागर के पार मैक्सिको के स्वर्ण-उत्पादक पर्वतों से हो सकता है। मक्षिका का अर्थ सोना होता है। मैक्सिको शब्द मक्षिका से ही विकसित माना गया है। यह भी संभव है कि मैक्सिको की उत्पत्ति सोने के खान में काम करने वाली आदिम जाति मैक्सिका से हुई है।६ मैक्सिको में एशियाई संस्कृति के प्राचीन अवशेष मिलने से इस अवधारणा से पुष्टि होती है। बालखिल्य ॠषियों का उल्लेख विष्णु-पुराण और रघुवंश में हुआ है जहाँ उनकी संख्या साठ हज़ार और आकृति अँगूठे से भी छोटी बतायी गयी है। कहा गया है कि वे सभी सूर्य के रथ के घोड़े हैं। इससे अनुमान किया जाता है कि यहाँ सूर्य की असंख्य किरणों का ही मानवीकरण हुआ है।७ उदय पर्वत का सौमनस नामक सुवर्णमय शिखर और प्रकाशपुंज के रुप में बालखिल्य ॠषियों के वर्णन से ऐसा प्रतीत होता है कि इस स्थल पर प्रशांत महासागर में सूर्योदय के भव्य दृश्य का ही भावमय एवं अतिरंजित चित्रण हुआ है। वाल्मीकि रामायण में पूर्व दिशा में जाने वाले दूतों के दिशा निर्देशन की तरह दक्षिण, पश्चिम और उत्तर दिशा में जाने वाले दूतों को भी मार्ग का निर्देश दिया गया है। इसी क्रम में उत्तर में ध्रुव प्रदेश, दक्षिण में लंका के दक्षिण के हिंद महासागरीय क्षेत्र और पश्चिम में अटलांटिक तक की भू-आकृतियों का काव्यमय चित्रण हुआ है जिससे समकालीन एशिया महादेश के भूगोल की जानकारी मिलती है। इस संदर्भ में उत्तर-ध्रुव प्रदेश का एक मनोरंजक चित्र उल्लेखनीय है। बैखानस सरोवर के आगे न तो सूर्य तथा न चंद्रमा दिखाई पड़ते हैं और न नक्षत्र तथा मेघमाला ही। उस प्रदेश के बाद शैलोदा नामक नदी है जिसके तट पर वंशी की ध्वनि करने वाले कीचक नामक बाँस मिलते हैं। उन्हीं बाँसों का बेरा बनाकर लोग शैलोदा को पारकर उत्तर-कुरु जाते है जहाँ सिद्ध पुरुष निवास करते हैं। उत्तर-कुरु के बाद समुद्र है जिसके मध्य भाग में सोमगिरि का सुवर्गमय शिखर दिखाई पड़ता है। वह क्षेत्र सूर्य से रहित है, फिर भी वह सोमगिरि के प्रभा से सदा प्रभावित होता रहता है।८ ऐसा मालूम पड़ता है कि यहाँ उत्तरीध्रुव प्रदेश का वर्णन हुआ है जहाँ छह महीनों तक सूर्य दिखाई नहीं पड़ता और छह महीनों तक क्षितिज के छोड़पर उसके दर्शन भी होते हैं, तो वह अल्पकाल के बाद ही आँखों से ओझल हो जाता है। ऐसी स्थिति में सूर्य की प्रभा से उद्भासित सोमगिरि के हिमशिखर निश्चय ही सुवर्णमय दीखते होंगे। अंतत: यह भी यथार्थ है कि सूर्य से रहित होने पर भी उत्तर-ध्रुव पूरी तरह अंधकारमय नहीं है।
सतु देशो विसूर्योऽपि तस्य मासा प्रकाशते। सूर्य लक्ष्याभिविज्ञेयस्तपतेव विवास्वता।९
राम कथा की विदेश-यात्रा के संदर्भ में वाल्मीकि रामायण का दिग्वर्णन इस अर्थ में प्रासंगिक है कि कालांतर में यह कथा उन स्थलों पर पहुँच ही नहीं गयी, बल्कि फलती-फूलती भी रही। बर्मा, थाईलैंड, कंपूचिया, लाओस, वियतनाम, मलयेशिया, इंडोनेशिया, फिलिपींस, तिब्बत, चीन, जापान, मंगोलिया, तुर्किस्तान, श्रीलंका और नेपाल की प्राचीन भाषाओं में राम कथा पर आधारित बहुत सारी साहित्यिक कृतियाँ है। अनेक देशों में यह कथा शिलाचित्रों की विशाल श्रृखलाओं में मौजूद हैं। इनके शिलालेखी प्रमाण भी मिलते है। अनेक देशों में प्राचीन काल से ही रामलीला का प्रचलन है। कुछ देशों में रामायण के घटना स्थलों का स्थानीकरण भी हुआ है।

Sri Ram, God Rama story in Phillipines

Philippines of RAM Katha: mahaladiya lavan
Indonesia and the Philippines after the Islamization of the malyeshiya like the RAM as the new narrative was submitted in color. There is also the possibility that it would like Buddhist and Jains were deliberately distorted. Dr. John r. Phruainsisko IK marnav language of the Philippines discovered warped ramkatha hosted compiled in whose name is libyan medals. Its on the SITA swayamvar kathavastu, marriages, abduction, Exploration and reclamation of is clearly visible. Morehead is the son of the Sultan of burundi lavan masir. The vicious cycle of people gone. So banish the Sultan sent pulungar by him on the island. There he set fire to the Earth that vrishra was bonded. Angel grabs at the behest of tuhen (God) prevented him from making his sacrifice and her bridesmaid that his death only in court will be from the incisive made katyusha asra. Sultan of the meandering and incoming niyog mangavarg had two sons named. Sultan of the two brothers pulunvandai The unique beauty of the daughter of malaila received information. They headed out to sea in search of her visit. The way his ship crashed. Incidentally, both brothers were pulunvandai edge. An old woman picked them take your House added. Senses had the sweetest sound of music when they arrive. The old woman's name was kabaiyan. That they were aware of the malaila swayamvar. According to the swayamvara of Princess who is in the room of the bond of the cane rajkumar succeeds in phekne, the same had to be his wedding. Both brothers attended the examination, But success was big brother. When the ball went into the room, the Princess he ball with your napkin, toppled down charity and betel nut ring. Prince has donated a napkin, betel nuts and betel nuts to retain the ring and there gave chitara. Both princes walked the other pratyakshi began to announce their victory, But the Sultan wanted to know who his daughter ring added. He was kabaiyan's house where he got three things to meandering. Some other shata ç on completing of the meandering and became malaila. Malaila vivahoprant walked home with two brothers, But on the way home and began living an idyllic Bliss site. Princess in the bucolic surroundings, one day saw the Golden shrringon deer. She asked her husband to catch him. Princess meandering to their loads of security, saying it had to get mentally Anuj that if he came to assist him, even if he did not move from there. After she heard her husband's voice by the Princess. He mangavarn go early to assist their agraj said. Then he went berserk on the refusal. Forcing mangavarn had to go to, But when she asked to keep the window closed malaila and forbids her to knock on the opening. Access to two of the same color mainwaring deer appear began falling. Both deer ran away in two directions. Both brothers began to chase them in different directions. Sterilized after younger brother trying to reach their first residence. He saw the broken wall of the House and the Princess is missing. Neighbors showed that hijacked the malaila madeira lavan. Lavan's Raj Bhavan on both brothers saw that access only near lavan malaila around fire flames Protected-take as holds of the annulus.1 here it is noteworthy that in his presence discovered malaila lax resulted from a monkey who was Hanuman roles. War begins on lavan alternates both brothers to war. He was wounded in battle is not a type Because the slaughter in his court were the sharp pieces of wood had to be from asra. The Court of mandangiri of lax asra entering lavan and she turned her sharp RASP on wood there. Mandangiri hit on the same asra lavan causing his death. At the end of the war of lax has climbed back to two brothers with malaila tax proceeds niyog sparked. Lax was with them. Was a Grand function on incoming niyog. On this occasion as a beautiful Prince lax has changed.Anti-nuke glee around 2.
फिलिपींस की राम कथा: महालादिया लावन
इंडोनेशिया और मलयेशिया की तरह फिलिपींस के इस्लामीकरण के बाद वहाँ की राम कथा को नये रुप रंग में प्रस्तुत किया गया। ऐसी भी संभावना है कि इसे बौद्ध और जैनियों की तरह जानबूझ कर विकृत किया गया। डॉ. जॉन आर. फ्रुैंसिस्को ने फिलिपींस की मारनव भाषा में संकलित इक विकृत रामकथा की खोज की है जिसका नाम मसलादिया लाबन है। इसकी कथावस्तु पर सीता के स्वयंवर, विवाह, अपहरण, अन्वेषण और उद्धार की छाप स्पष्ट रुप से दृष्टिगत होता है। महरादिया लावन बंदियार मसिर के सुल्तान का पुत्र है। उसके कुचक्र से बहुत लोगों की जान चली गयी। इसलिए सुल्तान उसे निर्वासित कर पुलूनगर द्वीप पर भेज दिया। वहाँ उसने उस वृश्र में आग लगा दी जिससे पृथ्वी बंधी हुई थी। देवदूत गैब्रियस के कहने पर तुहेन (ईश्वर) ने उसे अपना बलिदान करने से रोका और उसे वर दिया कि उसकी मृत्यु केवल उसके राजभवन में रखे काष्ट पर तीक्ष्ण किये अस्र से होगी। आगम नियोग के सुल्तान को मंगंदिरी और मंगवर्ग नामक दो पुत्र थे। दोनों भाईयों को पुलूनवंदै के सुल्तान की पुत्री मलैला के अनुपम सौंदर्य की जानकारी मिली। वे लोग उसकी तलाश में समुद्र यात्रा पर निकल पड़े। रास्ते में उनका जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो गया। संयोगवश दोनों भाई पुलूनवंदै के किनारे लग गये। एक बूढ़ी औरत उन्हें उठाकर अपने घर ले गयी। होश में आने पर उन्हें संगीत की मधुर ध्वनि सुनाई पड़ी। बूढ़ी औरत का नाम कबैयन था। उससे उन्हें मलैला के स्वयंवर की जानकारी मिली। राजकुमारी के स्वयंवर की शर्त के अनुसार जो कोई बेंत की बोंद को राजकुमीरी के कक्ष में फेकने में सफल होता, उसी से उसका विवाह होना था। दोनों भाईयों ने उस परीक्षा में भाग लिया, किंतु सफलता बड़े भाई को मिली। जब गेंद राजकुमारी के कक्ष में पहुँच गयी, तब उसने गेंद के साथ अपना रुमाल, सुपारी दान और अंगूठी नीचे गिरा दी। राजकुमार ने रुमाल, सुपारी दान और अंगूठी को अपने पास रख लिया और सुपारी को वहीं छितारा दिया। दोनों राजकुमारों के चले जाने पर अन्य प्रत्याक्षी अपनी-अपनी जीत की घोषणा करने लगे, किंतु सुल्तान यह जानना चाहता था कि उसकी पुत्री की अंगूठी किसके पास गयी। वह कबैयन के घर गया जहाँ उसे मंगंदिरी के पास तीनों चीजे मिली। कुछ अन्य शताç को पूरा करने पर मंगंदिरी और मलैला का विवाह हो गया। विवाहोपरांत दोनों भाई मलैला के साथ घर चल पड़े, किंतु रास्ते में ही एक रमणीक स्थल पर घर बनाकर रहने लगे। उसी ग्राम्य परिवेश में राजकुमारी ने एक दिन स्वर्ण श्रृंगों वाले हिरण को देखा। उसने अपने पति से उसे पकड़ने के लिए कहा। राजकुमारी की सुरक्षा का भार अपने अनुज को सौंपकर मंगंदिरी यह कहकर निकल पड़ा कि यदि वह स्वयं भी उसे सहायता के लिए पुकारे, तो भी वह वहाँ से नहीं हटे। उसके जाने के बाद राजकुमारी ने अपने पति की आवाज़ सुनी। उसने मंगवर्ण को अपने अग्रज की सहायता हेतु शीघ्र जाने को कहा। उसके मना करने पर वह बहुत उग्र हो गयी। मजबूर होकर मंगवर्ण को जाना पड़ा, किंतु जाते समय उसने मलैला को खिड़की बंद रखने के लिए कहा और खटखटाने पर भी उसे खोलने की मनाही की। मंगवर्न के पहुँचते ही एक ही रंग के दो हिरण दिखाई पड़ने लगे। दोनों हिरण दो दिशाओं में भाग चले। दोनों भाई अलग-अलग दिशा में उनका पीछा करने लगे। निष्फल प्रयत्न के बाद छोटा भाई पहले अपने निवास पर पहुँचा। उसने देखा कि घर की दीवार टूटी हुई है और राजकुमारी गायब है। पड़ोसियों से पता चला कि महारादिया लावन ने मलैला का अपहरण कर लिया। लावन के राजभवन पहुँचने पर दोनों भाईयों ने देखा कि लावन के निकट पहुँचते ही मलैला के चारों तरफ आग की लपटें सुरक्ष-वलय का रुप धारण कर लेती हैं।१ यहाँ यह उल्लेखनीय है कि मलैला की खोज-यात्रा में उनकी भेंट लक्ष्मण नामक बंदर से हुई जो हनुमान की भूमिका निभाने लगा। युद्ध आरंभ होने पर लावन बारी-बारी से दोनों भाईयों से युद्ध करने लगा। वह युद्ध में किसी प्रकार घायल नहीं होता था, क्योंकि उसका वध उसके राजभवन में रखे लकड़ी के टुकड़े पर तीक्ष्ण किये गये अस्र से ही होना था। लक्ष्मण मंदंगिरी के अस्र को लेकर लावन के राजभवन में प्रवेश कर गया और उसने वहाँ लकड़ी पर रगड़कर उसे तीक्ष्ण कर दिया। मंदंगिरी ने उसी अस्र से लावन पर प्रहार किया जिससे उसकी मृत्यु हो गई। युद्ध समाप्त होने पर लक्ष्मण के आदेश से एक घड़ियाल मलैला के साथ दोनों भाईयों को पीठ पर चढ़ा कर आगम नियोग चल पड़ा। लक्ष्मण उनके साथ गया। आगम नियोग पहुँचने पर एक भव्य समारोह हुआ। इस अवसर पर लक्ष्मण सुंदर राजकुमार के रुप में परिवर्तित हो गया।२ चारों ओर उल्लास छा गया।

Saturday, October 25, 2014


EXPLOSIVE PROOF OF RAMAYANA and Ancient Indian UFO Technology.'Viman' image found on 3,000-year-old rock art in Chhattisgarh. Directly links to Ramayana.

Five unique rock art points towards the Ramayana era. There is a drawing of 'viman' (airplane) among the five rock art. The nearby places in the area are linked to Ramayana. It is believed that Bhagavan Sri Ram had passed through the area.

BILASPUR : Five unique rock art, apparently dating back to about 3,000 years, was discovered from the dense forests of Suarlot hills in Korba district of Chhattisgarh.
The rock art, found by archaeologist Hari Singh Chhatri in the dense forests, show the concepts in the form of geometrical drawing. These drawings in red ochre are of humans, mermaids, animals including goat, and a geometrical pattern which resembles a 'viman' or an aeroplane.
"The rock art is still safe as it is located in dense forests. I have found pictures of a male and a female with a specific difference in their height. This could be of Lord Ram and Sita," archaeologist Hari Singh Chhatri told TOI.
"There was a place called 'Kharoud', which is also known as Khar Dusan (demon) Nagri. It is just 34km from Korba. And, the famous Shivrinarayan is just 3km from Kharoud," he said adding that these places could have links with the places where Lord Ram visited during his exile.
Rock Art Society of India secretary G L Badham said, "It is an excellent discovery. Of course, the period of Ramayana had connection with Chhattisgarh forests for which there are evidences. These rock art are one of them".

Open Proof for every one who told u that Ramayana and Mahabaratha are just a stories. ITS NOT .Its our History.Our Forefathers way of LIFE. This is just the beginning wait for MORE, MORE AND MORE REVELATION !

Tuesday, May 6, 2014


Indus Valley SealReferences to Rama -Indus  Seals speak of kanta-rama or ŒBeloved Rama¹, and kanta-atma-rama or ŒBeloved Soul Rama¹. One seal in particular speaks of samatvi sa ha rama meaning ŒRama treated all with equality¹. All this finds echo in the Valmiki Ramayana as Œarya sarva samashcaiva sadaiva priyadarshanah¹, or ŒArya to whom all were equal and was dear to everyone.¹

There is also a reference to Rama performing a successful fire ritual (or launching a fire missile) which again is mentioned in the Ramayana. There is another reference to Rama¹s successful crossing of the sea which again touches on the Ramayana. Of particular interest is the presence of ŒRama¹ in at least one West Asiatic seal from pre-Sargon layer in southern Mesopotamia. We know from Zoroastrian scripture that Rama was well known in ancient West Asia. The readings suggest that this goes back to a period long before 3500 BC. The Aryan invasion stands shattered, the Proto Dravidians are found to be a myth, and the cradle of civilization ‹ assuming there was such a thing ‹ is not Mesopotamia but Vedic India. Also, a version of the story of Rama existed more than a millian years ago, and known both in India and West Asia. And the Sanskrit language ‹ at least the Vedic version of it ‹ is of untold antiquity; it was certainly not brought to India by invading nomads in the second millennium.
Floods and maritime activity
To return to the seals and their contents, such Œhistorical¹ seals are exceptional. A great majority of the seals are different in character and content. Often their texts can be quite mundane. We find a reference to a craftsman by name Ravi whose products last twice as long as those made by other craftsmen (dvi-ayuh). One inscription speaks of a short-tempered mother-in-law; there is even mention of relieving fever with the help of water from a saligrama (fossil stone) ‹ a remedy still followed in many Indian households. We find numerous references to rivers (apah) and Œflows¹ (retah), suggesting the existence of an extensive system of waterways. We have texts like a madra retah (flow to the Madra country), and a vatsa retah (flow to the Vatsa country) indicating their presence. The Vedic Civilization was of course largely a maritime one, as indeed was the Harappan ‹ a fact noted by David Frawley. The seals confirm it. There is recent archaeological evidence suggesting the presence of Indian cotton in Mexico and Peru dating to 2500 BC and earlier (Rajaram and Frawley 1997), which again suggests maritime activity. As noted earlier, archaeological evidence also supports the fact that the Vedic people (and the Harappans) engaged in maritime activity. References to floods are common, and can sometimes be quite vivid. There is a particularly dramatic inscription, which speaks of workers laboring all night by fire, trying to stem the floods. The readings suggest that the floods were due to the encroachment of seawater and not necessarily the rivers. These messages should be of interest to archaeologists who have noted the damage to sites due to floods and salination. The great Harappan city of Dholavira in Gujarat is a striking example.
Vedic symbolism
Many seals contain messages reflecting Vedic symbolism. This can be illustrated with the help of the famous Pashupati seal, alongside its deciphered text.
The seal contains a meditating horned deity surrounded by five animals. The animals are ‹ elephant, musk deer, buffalo, tiger and rhinoceros. These five animals are often identified with the five senses, and the five associated elements ‹ fire, water, space, wind and earth (or soil). These elements that go to make up the material universe are known in the Vedic literature as panca maha-bhutas or the Five Great Elements. The reading on the seal is ishadyatah marah. Mara is the force opposed to creation ‹ one that causes the destruction of the universe. The seal message means: Mara is controlled by Ishvara. The seated deity is of course a representation of Ishvara.(BUDDHA ALSO DEALT WITH MARA JUST BEFORE ENLIGHTENMENT)
Hindu cosmology holds that both creation and destruction of the universe result from the action of the Five Great Elements. So Mara, the destructive force, is also composed of the Five Great Elements. With this background, the deciphered message ishadyatah marah allows us to interpret the symbolism of the famous Pashupati seal. It expresses the profound idea, that, in every cosmic cycle, both the creation and the destruction of the universe are caused by the action of the panca maha-bhutas (Five Great Elements) under the control of Ishvara. This remarkable interpretation was decoded and brought to my notice by Jha.
Collapse of Indus Valley.

Rare Ibex Seal of Indus Valley Era Unearthed in Pakistan

Indus Steatite Seal
LAHORE: Pakistani archaeologists have discovered a rare Indus Valley civilization-era seal in steatite dating back to 2,500-2,000 BC from the Cholistan area of Punjab province.
The seal features the carved figure of an ibex with two pictographs. It has a perforated boss on the back and varies from the style of Harappan seals. The seal which is almost square in shape is slightly broken on the right side. The figure of the ibex is however almost intact. The muscles, genitalia, hooves and tail of the ibex were engraved artistically with a high degree of skill and craftsmanship.
It was found at Wattoowala, located near Derawar Fort and along the ancient bed of the Hakra river, by a six-member team of archaeologists led by Punjab University archaeology department chairman Farzand Masih.
The rare seal was found at Wattoowala, located near Derawar Fort and along the ancient bed of the Hakra river. It was discovered by a six-member team of archaeologists led by Punjab University archaeology department chairman Farzand Masih.
 [from Times of India, Feb. 8, 2012]

Saturday, January 18, 2014

भगवान रामचन्द्र जी के १४ वर्षों के वनवास यात्रा का विवरण

 श्री राम से जुडे कुछ अहम् सबुत पेश हैं........
जिसे पढ़ के नास्तिक भी सोच में पड जायेंगे की रामायण सच्ची हैं या काल्पनिक-

भगवान रामचन्द्र जी के १४ वर्षों के वनवास यात्रा का विवरण 

पुराने उपलब्ध प्रमाणों और राम अवतार जी के शोध और अनुशंधानों के अनुसार कुल १९५ स्थानों पर राम और सीता जी के पुख्ता प्रमाण मिले हैं जिन्हें ५ भागों में वर्णित कर रहा हूँ
  • वनवास का प्रथम चरण गंगा का अंचल 

  1. सबसे पहले राम जी अयोध्या से चलकर तमसा नदी (गौराघाट,फैजाबाद,उत्तर प्रदेश) को पार किया जो अयोध्या से २० किमी की दूरी पर है |
  2. आगे बढ़ते हुए राम जी ने गोमती नदी को पर किया और श्रिंगवेरपुर (वर्त्तमान सिंगरोर,जिला इलाहाबाद )पहुंचे …आगे 2 किलोमीटर पर गंगा जी थीं और यहाँ से सुमंत को राम जी ने वापस कर दिया |
  3. बस यही जगह केवट प्रसंग के लिए प्रसिद्ध है |
  4. इसके बाद यमुना नदी को संगम के निकट पार कर के राम जी चित्रकूट में प्रवेश करते हैं|
  5. वाल्मीकि आश्रम,मंडव्य आश्रम,भारत कूप आज भी इन प्रसंगों की गाथा का गान कर रहे हैं |
  6. भारत मिलाप के बाद राम जी का चित्रकूट से प्रस्थान ,भारत चरण पादुका लेकर अयोध्या जी वापस |
  7. अगला पड़ाव श्री अत्रि मुनि का आश्रम
  • बनवास का द्वितीय चरण दंडक वन (दंडकारन्य)

  1. घने जंगलों और बरसात वाले जीवन को जीते हुए राम जी सीता और लक्षमण सहित सरभंग और सुतीक्षण मुनि के आश्रमों में पहुचते हैं |
  2. नर्मदा और महानदी के अंचल में उन्होंने अपना ज्यादा जीवन बिताया ,पन्ना ,रायपुर,बस्तर और जगदलपुर में
  3. तमाम जंगलों ,झीलों पहाड़ों और नदियों को पारकर राम जी अगस्त्य मुनि के आश्रम नाशिक पहुँचते हैं |
  4. जहाँ उन्हें अगस्त्य मुनि, अग्निशाला में बनाये हुए अपने अशत्र शस्त्र प्रदान करते हैं |
  • वनवास का तृतीय चरण गोदावरी अंचल

  1. अगस्त्य मुनि से मिलन के पश्चात राम जी पंचवटी (पांच वट वृक्षों से घिरा क्षेत्र ) जो आज भी नाशिक में गोदावरी के तट पर है यहाँ अपना निवास स्थान बनाये |यहीं आपने तड़का ,खर और दूषण का वध किया |
  2. यही वो “जनस्थान” है जो वाल्मीकि रामायण में कहा गया है …आज भी स्थित है नाशिक में
  3. जहाँ मारीच का वध हुआ वह स्थान मृग व्यघेश्वर और बानेश्वर नाम से आज भी मौजूद है नाशिक में |
  4. इसके बाद ही सीता हरण हुआ ….जटायु की मृत्यु सर्वतीर्थ नाम के स्थान पार हुई जो इगतपुरी तालुका नाशिक के ताकीद गाँव में मौजूद है |दूरी ५६ किमी नाशिक से |
इस स्थान को सर्वतीर्थ इसलिए कहा गया क्यों की यहीं पर मरणसन्न जटायु ने बताया था की सम्राट दशरथ की मृत्यु हो गई है ...और राम जी ने यहाँ जटायु का अंतिम संस्कार कर के पिता और जटायु का श्राद्ध तर्पण किया था |यद्यपि भारत ने भी अयोध्या में किया था श्राद्ध ,मानस में प्रसंग है "भरत किन्ही दस्गात्र विधाना "
  • वनवास का चतुर्थ चरण तुंगभद्रा और कावेरी के अंचल में 

  1. सीता की तलाश में राम लक्षमण जटायु मिलन और कबंध बाहुछेद कर के ऋष्यमूक पर्वत की ओर बढे ….|
  2. रास्ते में पंपा सरोवर के पास शबरी से मुलाकात हुई और नवधा भक्ति से शबरी को मुक्ति मिली |जो आज कल बेलगाँव का सुरेवन का इलाका है और आज भी ये बेर के कटीले वृक्षों के लिए ही प्रसिद्ध है |
  3. चन्दन के जंगलों को पार कर राम जी ऋष्यमूक की ओर बढ़ते हुए हनुमान और सुग्रीव से मिले ,सीता के आभूषण प्राप्त हुए और बाली का वध हुआ ….ये स्थान आज भी कर्णाटक के बेल्लारी के हम्पी में स्थित है |
  • बनवास का पंचम चरण समुद्र का अंचल

  1. कावेरी नदी के किनारे चलते ,चन्दन के वनों को पार करते कोड्डीकराई पहुचे पर पुनः पुल के निर्माण हेतु रामेश्वर आये जिसके हर प्रमाण छेदुकराई में उपलब्ध है |सागर तट के तीन दिनों तक अन्वेषण और शोध के बाद राम जी ने कोड्डीकराई और छेदुकराई को छोड़ सागर पर पुल निर्माण की सबसे उत्तम स्थिति रामेश्वरम की पाई ….और चौथे दिन इंजिनियर नल और नील ने पुल बंधन का कार्य प्रारम्भ किया |